पहले नजर का प्यार !!
अन्जान वो शहर था,
अन्जान थी निगाहेँ |
सूनसान दोपहर थी,
सुनसान थी वो राहें |
मुस्कान वो कहर थी,
मुस्कान थी अदाएँ |
नादान बेखबर था,
नादान थी वो आहें |
पहचान बेअसर थी,
पहचान थी वो बाहें |
सुकुनवान वो पहर थी,
सुकुनवान सब सदायें |
प्रेम अमर रहे !!
- रविन्द्र राजदार / @ojhaRN
*चित्र - इन्टरनेट साभार


