एक दफा ऐ बेवफा तुम मिलो,

तुझसे बेहतर कोई ना मुझे जाने,

मुझको लौटा दो मेरे ज़माने। 


वो अदा वो सदा तुम रखो,

जिस के हम बन गए थे दीवाने,

मुझको लौटा दो मेरे ज़माने। 


कौन होता है ऐसे जुदा,

मान कर के किसी को खुदा। 

नाव हूँ मै तो बिन खेवैया ,

लहरें देंगी अब मुझको डूबा। 


मै यहाँ हो जहाँ तुम मिलो,

अब कैसे रस्ते कटेंगे अनजाने,

मुझको लौटा दो मेरे ज़माने। 


क्यूँ ऐसा हुआ सिलसिला,

मिल के भी तूं ना मिला। 

आओ बैठो जरा पास तो,

दूर कर देंगे शिकवा गिला। 


मेहरमा मेरी जां तुम मिलो,

बन के ना रहो तुम बेगाने,

मुझको लौटा दो मेरे ज़माने। 


दे दे दवा या दे दे दुआ,

इससे बेहतर है के तू आ। 

अँधेरे सारे छट जायँगे,

छट जायेगा सारा धुआं। 


पहले सा मुस्कुरा तुम मिलो,

बन बैठे हैं फिर तेरे दीवाने,

मुझको लौटा दो मेरे ज़माने। 


- रविन्द्र राजदार / @RavindraRajdar


चित्र - इंटरनेट