मेरी आकांक्षा's image
Poetry1 min read

मेरी आकांक्षा

Ravindra RajdarRavindra Rajdar September 12, 2021
Share1 Bookmarks 235414 Reads3 Likes

नभ के जैसा उत्कृष्ट हो मन, 

हो ह्रदय अथाह समन्दर सा। 

आभा मंडल हो शिखरों सा,

हो देंह समस्त भूमण्डल सा। 


गायन में हो बीणा का स्वर,

हो दहाड़ सिंह के गर्जन सा। 

बानी में ज्ञान की धारा हो,

हो स्वरुप पूरा सुदर्शन सा। 


चलें तो जैसे गज मतवाला,

हो धरा में ध्वनि करतल सा। 

वेग पवन प्रकाश अश्व सा हो,<

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts