मेरे अभिमान मेरे सम्मान भगवान मेरे बाबूजी, 

मेरा दिल मेरे धड़कन हैं जान मेरे बाबूजी। 


हर खुशियां खरीद दी जो बिन मेरे कहे,

खुशियों से भरे खुशियों की दूकान मेरे बाबूजी। 


कभी नरम कभी गरम है पिता का जो धरम,

है सोने सा तराशा मुझे जो ऐसे महान मेरे बाबूजी। 


हजारों शोहरतों की ज़रुरत कहाँ है मुझे,

उनके नाम पे जीता हूँ हैं पहचान मेरे बाबूजी। 


कभी ख्वाहिश नहीं हुयी और अमीर होने की,

हर ख्वाहिश पे खरे उतरे ऐसे धनवान मेरे बाबूजी। 


लिख तो और भी सकता हूँ पर बच्चा ही हूँ,

हर लिखावट पड़ेगी कम ऐसे इंसान मेरे बाबूजी। 


मेरे अभिमान मेरे सम्मान भगवान मेरे बाबूजी, 

मेरा दिल मेरे धड़कन हैं जान मेरे बाबूजी। 


- रविन्द्र राजदार / @RavindraRajdar