मेरा ख्वाब है मै वहां रहूँ, 


जहाँ मां मुझे नींद से जगाये,

जहाँ पिता जी मुझपर गुस्साएं। 


जहाँ पत्नी मुझ पर चिल्लाये,

जहाँ मेरे बच्चे दौड़े आएं। 


जहाँ शाम को चाय पे जाएँ,

जहाँ मेरे यार मिलने आएं। 


जहाँ इसकी उसकी बतियांएं,

जहाँ बेवजह ठहाके लगाएं। 


जहाँ पर खेत घूम पाएं,

जहाँ बारिश में भीग जाएँ। 


जहाँ पर नेटवर्क ही न आये,

जहाँ पर किताबों में खो पाएं। 


जहाँ हों चैन की सदायें,

जहाँ पर जल्दी से नींद आये। 


- रविन्द्र राजदार / @RavindraRajdar


चित्र - इंटरनेट