तेरे मेरे बीच जो मौन है वही खलता है,

बाकी तो शिकवा गिला सब चलता है। 


पास होके भी जो दूरी है वो ठीक नही, 

बाकी तो दूरियों में भी इश्क़ चलता है।


तुम अचानक जो बदल गए क्या कहें, 

बाकी तो मुझसा सदियों नही बदलता है।


क्या बात थी जो तुम टूटकर संभल गए, 

बाकी तो टूटकर कोई नही संभलता है। 


गवाही चाँद दे देगा या सूरज भी दे देगा, 

बाकी तो बिन मेरे कोई भी नही ढलता है। 


तुम ही वजह हो ज़िन्दगी की ए जान लो, 

बाकी तो खुद से भी दिल नही बहलता है। 


रविन्द्र राजदार / @RavindraRajdar


चित्र - इंटरनेट