मै जितना ऊपर खड़ा हूँ,
उतना ही निचे भी गड़ा हूँ।
ऐसे ही नहीं मै हूँ हारा हुआ,
जितने के लिए खुद से भी लड़ा हूँ।
अमीर होने की ज़िद में,
ना छोटा बचा ना हुआ मै बड़ा हूँ।
कभी भी फूट सकता हूँ मै,
अभी तो एक सुन्दर सा घड़ा हूँ।
उतरना चढ़ना मुश्किल है,
इस तरह से पहांड पर चढ़ा हूँ।
लौटना अब नहीं है आसां,
जबकि थोड़ा सा ही आगे बढ़ा हूँ।
बहुत ही कम लिखा हूँ,
बशर्ते दुनिया को ज्यादा ही पढ़ा हूँ।
- रविन्द्र राजदार / @RavindraRajdar


