खुद ही सारथी बनकर के खुद को उपदेश सुनाना होगा,
कृष्ण नहीं आएंगे अब खुद ही गांडीव उठाना होगा।
छोड़ सहारा औरों का खुद से ही खुद टंकार करो,
सबके अंदर है सिंघनाद कभी तो एक हुंकार भरो,
खुद के सम्बल से ही खुद का स्वदेश बचाना होगा,
कृष्ण नहीं आएंगे अब खुद ही गांडीव उठाना होगा।
बाज बनो तुम चील बनो और आसमान में राज करो,
कर सकते हो बहुत अकेले बस बीरों जैसा आगाज करो,
खुद पे भरोसा करके ही खुद का पौरुष दर्शाना होगा,
कृष्ण नहीं आएंगे अब खुद ही गांडीव उठाना होगा।
एक अकेले परशुराम ने कैसा नर संघार किया था,
एक अकेले हनुमान ने लंका में हाहाकार किया था,
खुद भी अकेला होकर सवा लाख से भी भीड़ जाना होगा,
कृष्ण नहीं आएंगे अब खुद ही गांडीव उठाना होगा।
- रविन्द्र राजदार


