
बेटा किसान का,
चला था सीखने प्रबंधन।
थी हजारों बेड़ियाँ,
थे धन के भी बहुत बंधन।
बुद्ध नगरी से किया,
शिवाजी राज का वो बंदन।
माँ बाप का प्यार था,
था सर पर राम नाम चन्दन।
भाई का जोश था,
था दोस्तों का जोशबर्धन।
भोजपुरिआ जवान था,
था बस हिंदी का राजनंदन।
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