सिसकियाँ बारूद पर भारी होंगी, 

जब जहाँ के मिटने की तैयारी होगी। 


शोर में भी शोर सुनाई न देगा, 

बशर्ते बातें तब भी सारी होंगी। 


तुम मुतमइन रहोगे जलजले में,

ऐसी तेरे अंदर कोई लाचारी होगी। 


मिट जायेगा गुरुर और दहशत भी, 

मिट जाएगी जो भी फनकारी होगी। 


मिट्टी पानी और हवा रहेगी बस,

रहेगी ना जो तेरी महल अटारी होगी। 


राजदार होके भी वो राज नही समझे, 

जो कहते थे बस तेरी राजदारी होगी। 



- रविन्द्र राजदार / @RavindraRajdar


चित्र - इंटरनेट