
चाहता कोई नही के हो इनका होना,
होही जाता है इश्क़ हो या हो कोरोना।
कोई नही दवाई दोनों मर्ज की बनी,
नाही चैन से जगना ना चैन से सोना।
मिलने से ए फैले मिलने से वो फैले,
जैसे ही ये फैलें बचे रोना और रोना।
रुंधता गला इसमें उसमे भी रुंधता है,
साँस चैन की लो तुम्हे बेचैन क्यों होना।
बुखार में होता है दोनों में ही आदमी,
दोनों कहते हैं मेरे अख्तियार में रहोना।
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