हार भी जाना कभी
गर प्यार को बचाना हो,
खार न खाना कभी
गर यार को बचाना हो।
यूँ क्यूँ लगे हो
नफरतों के बीज बोने में,
क्या करोगे तुम
गर संसार को बचाना हो।
तेरी जलन से
एक दिन तेरा भी घर जलेगा,
क्या करोगे तुम
गर घर बार को बचाना हो।
मै कह दिया
तुम जो मान लो तो बात बने,
क्या करोगे तुम
गर "राजदार" को बचाना हो।
हार भी जाना कभी
गर प्यार को बचाना हो,
खार न खाना कभी
गर यार को बचाना हो।
-रविन्द्र राजदार / @RavindraRajdar
*खार खाना - इर्ष्या करना
*चित्र- इंटरनेट साभार


