नदिया का पानी नहीं लौटे,
ना लौटे बहत बयरिया।
जी ले जी ले वो पगले ,
लौटी कहाँ है उमरिया।
मन में ना कोई रखना कुंठा,
सबको जाना है बैकुण्ठा।
छोड़ मोह धन धान का प्यारे,
चाहे छुट जाये महल अटरिया।
जी ले जी ले वो पगले…..
जो मिला है वही है सोना,
मिल न सका उसका क्या रोना।
पांव पसारो जी भर का रे,
चाहे छोटी होये चदरिया।
जी ले जी ले वो पगले…..
तुमको है बस चलते जाना ,
ना रुकना और ना पछताना।
कदम तुम्हारा कभी ना हारे,
चाहे लम्बी हो कितनी डगरिया।
जी ले जी ले वो पगले…..
गाये औघड़ गाये कबीरा ,
मगन रहे हर वक़्त फकीरा।
हैं भगवन के ही तो सहारे,
चाहे मिले न मिले सँवरिया।
जी ले जी ले वो पगले…..
जी ले जी ले वो पगले
लौटी कहाँ है उमरिया
- रविन्द्र राजदार
*चित्र - इंटरनेट साभार


