
कुछ साबित करने में,
लगा है अब जमाना।
कहीं तो पहुंचने में,
है खूब आना जाना।
हांसिल को छोड़ ढूंढे,
हरदम नया ठिकाना।
न जाने क्या तलाश है,
जो है यूँ मशरूफाना।
साबित के खातिर खुद ही,
खुद ही को क्यों भुलाना।
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कुछ साबित करने में,
लगा है अब जमाना।
कहीं तो पहुंचने में,
है खूब आना जाना।
हांसिल को छोड़ ढूंढे,
हरदम नया ठिकाना।
न जाने क्या तलाश है,
जो है यूँ मशरूफाना।
साबित के खातिर खुद ही,
खुद ही को क्यों भुलाना।