चलो जमाये मुशायरे
कुछ ग़म के मारों को बुलाओ,
जो खुश है छोड़ो उन्हें
जाके मेरे यारों को बुलाओ |
बेगुनाह जो हों सजायाफ्ता
ऐसे ही गुनहगारों को बुलाओ,
कर्ज लेके भी हैं जो भूखे
ऐसे ही कर्जदारों को बुलाओ |
दुःख में भी जो मुस्कुराएं
ऐसे सभी दिलदारों को बुलाओ,
जो दर्द को गजल कर दें
ऐसे सभी राजदारों को बुलाओ |
- रविन्द्र राजदार / @RavindraRajdar
*चित्र - इंटरनेट साभार


