हफ्ते में कम से कम इक बार कीजिए

ये प्रकृति है, प्रकृति से प्यार कीजिए

भैया, मेरे मालिक, मेरे सरकार कीजिए

ये प्रकृति है, प्रकृति से प्यार कीजिए


निज स्वार्थ में सुविधाओं को जुगाड़ रहा है

पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ रहा है

चौरासी लाख योनि हैं, इस सृष्टि में मगर

इंसान है जो प्रकृति उजाड़ रहा है

जीना न अगली नस्ल का दुश्वार कीजिए

ये प्रकृति है, प्रकृति से प्यार कीजिए


वायु, अग्नि, जल, धरा, ये आसमान है

इन्हीं में सारे देवी, देव विद्यमान हैं

जीवन की हर दशा का मूल स्रोत हैं यही

यही तो सर्वश्रेष्ठ, सर्वशक्तिमान है

करबद्ध होके इनका आभार कीजिए

ये प्रकृति है, प्रकृति से प्यार कीजिए


~Ravi


#WorldPoetryDay, #KavishalaPoetryContest,