वैसे तो सारी दुनियाँ के, ऊपर ये बादल बरसे है
पर एक अकेला दीवाना, तेरे प्यार की खातिर तरसे है
प्यार की पहली बारिश में, तू मुझको आज भिगा जा रे
आजा रे माही आजा रे, ओ माही मेरे आजा रे
तेरा चाँद सा मुखड़ा दिखला दे, मत ओट करे दरवज्जे की
तड़पाए क्यूँ इतना ज़ालिम, क्या जान ही लेगी बच्चे की
तेरे नैन कटारी से घायल, मैं बेबस और बेचारा
गलियों में तेरी भटक रहा, बन पागल, प्रेमी, आवारा
तू बालकनी में आकर के इक बार झलक दिखला जा रे
आजा रे माही आजा रे, ओ माही मेरे आजा रे
वैसे तो सोणी कुड़ियों की, दुनियाँ में कोई कमी नहीं
पर आज तलक मेरे इस पगले, दिल को कोई जमी नहीं
तू इक कली गुलाब सी और बंदा ये भंवरा सा है
अरमान नहीं ज्यादा कुछ बस, तेरी खुशबू का प्यासा है
अपनी सांसों की खुशबू से, मेरी सांसे महका जा रे
आजा रे माही आजा रे, ओ माही मेरे आजा रे
~Ravi
