क्यूँ ख़ुश्क है इन आंखों का पानी न पूछिए
राजा को क्यूँ नहीं मिली रानी न पूछिए
कहने को तो, दो जिस्म और इक जान थे फिर भी
क्यूँ रह गई अधूरी कहानी न पूछिए
हद से भी ग़ुजर सकती थी, जानिब मेरे लिए
पगली थी कितनी मेरी दीवानी न पूछिए
आँखों से जान लेती थी, मेरे दिल का हाल सब
वो हो गई थी कितनी सयानी न पूछिए
इक रोज़ देख छिपकली, मुझसे लिपट गई
उफ़्फ! दिलनशीं वो बात पुरानी न पूछिए
उसने लबों से मुझको, दी थी कहाँ कहाँ
प्यार की वो पहली निशानी न पुछिए
जाने के बाद उसके, मेरी तो ज़िंदगी
अब हो गई है कितनी वीरानी न पूछिए
~Ravi


