टूटता नन्हा तारा...'s image
714K

टूटता नन्हा तारा...

आसमॉ के उपर एक जहाँ था मेरा । लाखो के बीच था मै, एक नन्हा सा तारा । एक रात अंधेरी छाओ मे, ले रौश्नी अपनी बाहो मे। मै घुम रहा था अंतरिक्ष मे, साथी तारो के संघ मे । आ लड़ा एक तारा ज़ोर से , मेरे आगे के छोर से । इस बड़े ज़ोर क झट्के से, मै गिरा टूट कर उपर से। मै देख रहा था उपर को, मेरे साथी सब तारो को । छोड़ अपनी चम्कीली दुनियॉ को, चल पड़ा अंजानी दुनियॉ को । थे आगे अंधेरे रास्ते, ना कोई था अब साथ मेरे। मै डर रहा था, चल रहा था,
Read More! Earn More! Learn More!