
आसमॉ के उपर एक जहाँ था मेरा ।
लाखो के बीच था मै, एक नन्हा सा तारा ।
एक रात अंधेरी छाओ मे, ले रौश्नी अपनी बाहो मे।
मै घुम रहा था अंतरिक्ष मे, साथी तारो के संघ मे ।
आ लड़ा एक तारा ज़ोर से , मेरे आगे के छोर से ।
इस बड़े ज़ोर क झट्के से, मै गिरा टूट कर उपर से।
मै देख रहा था उपर को, मेरे साथी सब तारो को ।
छोड़ अपनी चम्कीली दुनियॉ को, चल पड़ा अंजानी दुनियॉ को ।
थे आगे अंधेरे रास्ते, ना कोई था अब साथ मेरे।
मै डर रहा था, चल रहा था,
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