ममता की बाती से सोख ले प्यार के तेल सभी। आजा एक बार फिर तू वही नन्हा चिराग़ बनकर।।
टिटिमाती लौ से कर दे उजियारा ममता का घर-आंगन। आजा एक बार फिर नाच ले तू आंगन मे चाकरी बनकर।। रोक लूं तुझे ममता की आंचल मे लपककर अभी। आजा एक बार फिर आसमां को चीरते राॅकेट बनकर।। हर तूफान से बचा लूं तुझे अपनी आंचल मे छुपाकर। आजा एक बार फिर तेज़ तूफान मे चमकती बिजली बनकर।। काली निशा से घिरी है जिंदगी हर तरफ यहां। आजा एक बार फिर आसमां में सतरंगी रोशनी बनकर।। देख बुझने को है फुलझड़ी वो जो लाडो की हाथ मे है। आजा एक बार फिर तू वो टिमटिमाती लौ बनकर।। लग रहा है डर फूटते बम और बुलेट से बहुत। आजा एक बार फिर अपनी मां का सहारा बनकर।। ताक रही हैं अंखियां तेरी राहें हो आतुर। आजा अब तू ना कर मेरा मन यूं व्याकुल।। आजा कि कहीं बुझ न जाए ये ढिबरी माटी की पुरानी।। आजा इससे पहले कि नयनों के नीर बुझा दे लौ ढिबरी की।। आके जल्दी से इस ढिबरी को स्नेह की बाती दे दे।। आजा कि इस दिवाली दिपक बनकर नयन और आंगन को रोशन कर दे।।।।