आज अपना तो कल पराया होता है स्टेशन।
किसी के हर रात का गुजारा होता है स्टेशन।
कुछ के लिए एक रात का सहारा है स्टेशन।
कुछ के लिए गाड़ी बदलने का ठिकाना है स्टेशन।
यूं एक गाड़ी को पकड़ कर मत रख ऐ दोस्त।
बढ़ने दे, आगे उसके इंतज़ार में और भी यात्री हैं।
स्टेशन है ये ज़िंदगी...छोड़ जिद उसे आगे बढ़ने दे..