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यार


रूठ रूठ के चले गए लोग सारे,कहते है कि मैंने मनाया ही नही,ये सुख दुख के मेरे सामाजिक यार,मेरी मैय्यत पर भी ना आये,कहते है मैंने बुलाया ही नही।

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