लोभ लाभ लक्ष्य का लालच है,

संभलो संख्या ज्यादा, संकरा रास्ता नही सब सच है।


मड़ई ठीक, मंगन नही मंजूर,

मितव्यव्य को मजबूर,

मंद मंद हानि नही ये मरच है,

मग्न है, मठ में खड़े मछलिया निहारे,

मटमैला नही, पर ये मन मस्त है,

संभलो संख्या ज्यादा, संकरा रास्ता नही सब सच है।


कंगन का कंकाल है,

कैसे कटे ये कटुता का काल है,

खंडित खटिया खतरा,

खजाना खा खबर खरगोश का खास है,


गंवार गणनायक गण गरीब गले की की गांठ है,

घन घन बजे जो घनघोर धन,

घायल घमंड में,

घृणा, घाव, घसीटता ये धर्म का घाघ है।

चट चढ़ , चट चकाचौंध ,

चट चन्दा सा चमक,

चरम चढ़े चरमपंथी,

चित्र बाबा का चिपकाये,

चहुओर चालीस चिरस्थ है,

संभलो संख्या ज्यादा, संकरा रास्ता नही सब सच है।


जड़बुद्धि जंजीर जंजाल में जकड़े,

जनक जैसे जंगली, जो जवान जलजला से जले,

जीव , जंतु जैसा ,

ज्ञानी , ज्ञान ना ज्यादा जानता

जौहरी जबरदस्त, जौहर जो ना पहचानता।


छोड़ छप्पर , छोड़ छत्रछाया,

छीनता छायाचित्र है,

छोड़ सारी छांव,

छिद्र छिद्र छिलके छिपाये,

छिटकता सारा छत है,

संभलो संख्या ज्यादा, संकरा रास्ता नही सब सच है।