ये जो अपने रुतबे में अकड़ कर खड़े है,
ये जो सरकारी बंगलो में आराम से पड़े है,
ये जो अपनी शक्ति का प्रदर्शन हम पर करते है,
भूल जाते है शायद,
हमारे मेहनत के पैसों पर ही पलते है।


ये जो अपने रुतबे में अकड़ कर खड़े है,
ये जो सरकारी बंगलो में आराम से पड़े है,
ये जो अपनी शक्ति का प्रदर्शन हम पर करते है,
भूल जाते है शायद,
हमारे मेहनत के पैसों पर ही पलते है।