पलट कर देखा कभी वहाँ का मंजर,

जहाँ से तुम सब कुछ छोड़ चले,

वापस आने का वादा करके गए थे ना,

हम भी वक़्त थाम के खड़े है,

अब तक ना हिले,

रिस रिस कर रिसता,

बूंद बूंद रक्त तुम्हारी चोट से,

एक एक पल गिन रहे है,

अब तब जाने कब फिर मिले।