पग पग पर रखे कंकर,

कंकर कैसे हटाया जाय,

किनारो पर ही तो चल रहा हूँ,

विनती मानो, ये किनारा ना अब डुबाया जाय।


बैर नही मुझको इस जग से,

ऊँचाई करूँगा छोटी, इक दिन,

सबकी अपने बल से तप से,

मुझको अब ना इस गिनती में मिलाया जाय,

किनारों पर ही तो चल रहा हूँ,

विनती मानो, ये किनारा ना अब डुबाया जाय