Poetry 1 min read 775.1K reads

कैसे


किससे कहाँ कैसे आवाज़ उठाऊँ मैं,भारी बारिश की बूंदों को पकड़,कमरे तक अब कैसे लाऊँ मैं,सारा रास्ता ही गोल गोल है,तो मंजिल तक खुद को कैसे पहुँचाऊँ मैं।

Read more Earn more Learn more