देख चाहे तू इस पार है तो क्या,
जाना अगर उस पार है तो क्या,
तू गोते लगा, नौका का क्यों इंतज़ार है,
बैठेगा बाट जोहते, नौका तो बस व्यापार है,
तू बांध मुट्ठी, देखता क्यों समस्या का आकार है,
कर ले दृढ़ निश्चय, ऊपर वाला तो हमेशा तैयार है,
बैठ तेरी ही राह देख रहा वो, तेरा क्या विचार है।


