मृत्यु को दासी बनाकर रखने वाला रावण भी अपने साथ अंगरक्षक रखता था, क्योंकि उसे भी किसी का भय था। ये भय और डर ही है जो इंसान को आगे बढ़ने से रोकता है, बुराई के रास्ते पर भी और अच्छाई के रास्ते पर भी।
सही डर को पास रखे और गलत को तोड़ कर आगे बढ़े।


मृत्यु को दासी बनाकर रखने वाला रावण भी अपने साथ अंगरक्षक रखता था, क्योंकि उसे भी किसी का भय था। ये भय और डर ही है जो इंसान को आगे बढ़ने से रोकता है, बुराई के रास्ते पर भी और अच्छाई के रास्ते पर भी।
सही डर को पास रखे और गलत को तोड़ कर आगे बढ़े।