चिरांद्घ के घर क्या चिराग जलाऊँ,तुम तो जलते तपते सूरज हो,हवाओं में दिया जलाने कीजो खुशी, वो भला तुम्हे कैसे बताऊँ।
चिरांद्घ के घर क्या चिराग जलाऊँ,तुम तो जलते तपते सूरज हो,
हवाओं में दिया जलाने कीजो खुशी, वो भला तुम्हे कैसे बताऊँ।