गाय माता है तो बैल क्या है? सवाल सुनके मुझे भी बड़ी हँसी आयी, पर फिर जब सड़क पर घूमते एक आवारा बछड़े से पूछा तो आपकी ही तरह मेरे भी हँसोड़े दांत अंदर हो गए।


उस बछड़े ने बताया कि उसे कई दिनों से भोजन ही नसीब नही हुआ है।


अरे, भोजन तो छोड़ो ये जो सारे इंसान मुझे गधे की तरह दुलत्ती मारते है वो अलग है, बछड़ा रो पड़ा।


बछड़ा भले ही नाजायज था पर उसकी व्यथा मुझे जायज लगी, पर मैंने पहले अपने सारे प्रश्नों का उत्तर लेकर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित समझा।


मैंने सवाल दागा कि अगर भोजन नही मिलता तो लोग ये क्यों कहते कि सांड हुए जा रहे हो, सांड और बैल का मतलब ही है ज्यादा भोजन लेने वाला ताकतवर जानवर।


सवाल सुनकर बछड़ा मुस्कराया और बोला, ये आप किस लाइन में आ गए भाईसाहब, आपको सवाल ही पूछना नही आता, इसका जवाब ये है कि एक तो मैं सांड या बैल नही बछड़ा हूँ, और चूंकि बछड़े की लोगो को कोई जरूरत नही है, इसलिए उसे भोजन नही मिलता, जब मैं सांड या बैल बन जाऊँगा, तब लोग मुझे भी भोजन देने लगेंगे, फेंककर ही देंगे, पर देंगे।


मैंने बछड़े से फिर पूछा कि ये बताओ तुम्हारे पड़ोस वाली गाय का जो बच्चा हुआ वो तो इधर नही घूम रहा आवारा, तुमने ही कोई गलती की होगी और घर से निकाल दिए गए होगे, अन्यथा फिजूल में भला तुम्हे कोई क्यों मारेगा।


बछड़े ने मुझे तिरछी नजरों से देखा और बोला कि पड़ोस वाली चाची को लड़की हुई है।


तो? मैंने झट से सवाल दागा।


तो ये की मेरी भी हालत तुम्हारे जैसे ही है,जैसे तुम जो ये उलूल जुलूल सवाल मुझसे करके लेख लिखने के चक्कर मे हो, और उसके बाद भी कोई पढ़ता नही है, वैसे ही हाल अपने यहाँ भी है।


बछड़े ने बिल्कुल दुखती रग पर हाथ रख दिया, मैंने पूछा कि तो आप ही बता दो लोग मेरा लेख क्यों नही पढ़ते?


क्योंकि तुम्हारी मूछें है, जो लोगो की कोमल आँखों मे चुभती है, लोग पढ़ना कम और देखना ज्यादा पसंद करते है भंते।


बात कुछ बनी नही, तो तू क्यों भूखा घूम रहा है भाई?


अरे हमारे यहाँ भी वही हिसाब है, मैं दूध नही देता, मेरा गोबर अमृत भी नही है, तो मुझे भोजन क्यों मिलेगा भला, बछड़ा झुंझलाकर बोला।


लोग पैदा होने के कुछ दिनों बाद मुझे निकाल देते है, क्योंकि माता जी का दूध मिलने लगता है,

उसके बाद मेरी याद सिर्फ तब आती है जब मैं बड़ा हो जाता हूँ।


तब तक मुझे अपने भोजन का इंतज़ाम स्वयं करना होता है, आपकी तरह नही है कि एक दिन भोजन नही मिला तो क्या हुआ पत्नी की गालियों से ही पेट भर लिया।


इतना कहकर बछड़ा मुझे दुत्कारते हुए, भोजन की तलाश में आगे बढ़ गया।


मैंने उसका पीछा किया हुआ है क्योंकि हमारा भोजन भी तो लिखने से आता है, तो जैसे ही बछड़ा पकड़ में आता है, मैं अगला लेख आप तक पहुंचा दूंगा। 









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