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क़यास


कभी इधर तो कभी उधरनज़र दौड़ाता हूं,क्या इशारा हैमौसम का ये क़यास करता हूं।

ज़मीं के साथ-साथआसमां ने भी रंग बदल लिया,सफ़द काले बादलों के बदलेउन्हें गुलाबी देख रहा हूं।

— रवि नकुम (ख़ामोशी)
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