कभी इधर तो कभी उधरनज़र दौड़ाता हूं,क्या इशारा हैमौसम का ये क़यास करता हूं।ज़मीं के साथ-साथआसमां ने भी रंग बदल लिया,सफ़द काले बादलों के बदलेउन्हें गुलाबी देख रहा हूं।
कभी इधर तो कभी उधरनज़र दौड़ाता हूं,क्या इशारा हैमौसम का ये क़यास करता हूं।
ज़मीं के साथ-साथआसमां ने भी रंग बदल लिया,सफ़द काले बादलों के बदलेउन्हें गुलाबी देख रहा हूं।