ये ख्वाहिशे जो तेरी मेरी
जाने क्या ख्वाब बन उड़े
कभी गिरें कभी चलें
कभी तिनका तिनका बुने
कभी राग धुन ये छेड़ दे
कभी बिरहा सुन मरे
कभी करवटे बदल बदल
कभी सिलवटो से डरे
कभी चाय सी लगे
हर घूंट में हो ताजगी
कभी थकान सी लगे
हर चाल इसकी आलसी ....
#ravim1987


