तेरे सरपरस्ती के हैं मोहताज सब
तेरे सर के हैं ताज़ सब
तू ना छोटा बड़ा जानता
तू ये ना फ़र्क पेहचानता
तू अमीरों की चौख़ट भी है झाँकता
तुझे गरीबों के चीखों का भी वास्ता
तू निर्मोही है तू ये सब क्या जानता
तुझे जो जहाँ घसीट ले
उसी के घर तू लांघता
तू मंदिर-मस्जिद भी न जानता
तू जाति - धर्म ना मानता
तू वक़्त के हिसाब से ईधर -उधर है रेंगता
तुझे जहाँ जो फ़ेंक दे उसी की आँखे सेंकता
तेरा ना ख़ुद का रास्ता
तू लहू के रंग को क्या जानता
तू ना छोटा बड़ा जानता
तू ये ना फ़र्क पेहचानता
#ravim1987


