एक ही है बंदर
ना जाने कितने मदारी
कोई हँसता कोई रोता
कभी गुस्से में डमरू बजाता मदारी
तालियां बजाती जनता
पर उनकी दिलों के जज़्बात खाली
कभी उल्टा होता बंदर
कभी उछल कर सिटी बजाता
कभी नाच करता
कभी बनता है ये गुंडा मवाली
एक ही है बंदर
ना जाने कितने मदारी
#ravim1987


