उम्मीद सी जगी है इस दिल में, तुमसे नजर मिली है ये जबसे;

साँसे है बहक रही, धड़कनों पे बस नही है मेरा तबसे!


अपने दिल के कोने में कही जगह दोगी, उम्मीद है ये तुमसे;

अकेले मे ये सोचता हूँ, गलती क्या हुई थी मुझसे!


लाखों नहीं करोड़ो नहीं, कीमती हो तुम इन सबसे;

मिलने को तुम आई ना, इंतज़ार तुम्हारा कर रहा हु मैं कबसे!


दिन है मेरा बन जाता, तुम्हारी एक नजर से;

मुश्किल नहीं नामुमकिन है, तुम्हारा नाम मिटाना मेरे दिल-जान-जिगर से!


धड़कन है मेरी रुक जाती, तुम्हे खोने के डर से;

काश तुम मेरे करीब होति, हम एक हो जाते फिरसे!


लेखक: - रवि कुमार❤️