रास्ते कई पर मंजिल एक था,
हमसफ़र कई पर सफर एक था;
रंग कई बदले ज़िन्दगी ने,
मगर हर रंग का असर एक था।
रोता था-बिल्खता था,
टुट के बिखर जाता;
मगर हर बार जीसने सम्भाला,
वो माँ का हाँथ एक था।
आंसु देने वाले कई,
मगर आंसु पोंछने वाला एक था;
तमाशा देखने तो सब आते थे,
मगर गीरे हुए को उठाने वाला एक था।
गलतियां हो जातिं है अक्सर इंसानो से,
मगर उन गलतियों का पछतावा एक था;
रात का अंधेरा भले सबके अलग थे,
मगर सबको जगाने वाला सवेरा एक था।
लेखक- रवि❤️

