कितना हंसी वो सपना था, जिसमे तू मेरा अपना था;

तेरी हर बात पे प्यार आता था, कभी तेरी नाराजगी कभी तेरा हँसना था!


चाँद से ज्यादा रोसन तेरे माथे की बिंदिया थी, तेरी हर अदा उङाती मेरी निंदिया थी;

पलकें उठा के जब तू मेरा दीदार करती थी; तेरी नज़र का बाण मेरे जिगर को तार-तार करती थी!


गुलाब से ज्यादा सुर्ख लाल तेरे होंठो की लाली थी, तेरी हर सांस दिल धड़काने वाली थी;

तेरी नागिन सी चाल बढ़ी मतवाली थी, उफ़ तेरी एक मुस्कान गोली चलवाने वाली थी!


हमारे प्यार की पतंग दूर हवा में लहरा रही थी, तू उसे अपने उँगलियों पे नचा रही थी;

हवाओं से लड़कर ये पतंग ऊपर ही बढ़ती जा रही थी, कट के ये पतंग प्यार की, दूर किसी की छत पे गिरती नजर आ रही थी!


सुबह की मीठी किरण मुझे डरा रही थी, जब तक मैं नींद में था तू मेरा साथ निभा रही थी;

धीरे धीरे तू आँखों के सामने गायब हो गयी, माँ की एक आवाज आई उठ नालायक सुबह हो गयी!


टूट गया सपना टूट गयी उम्मीद, हो गयी सुबह खुल गयी नींद;

कितना हंसी वो सपना था, जिसमे तू मेरा अपना था!


लेखक- रवि कुमार