बीमारी.....

मुझे कुछ ग़ज़लें पूरी करनी है....

हताश हो चुके हैं रदीफ़ मेरे इन्तेज़ार में

काफ़िये सर से सर फोड़ने लगे हैं

मज़मून अपने बाल नोच रहे हैं

जिस पर ग़ज़ल कहनी है, वो लड़की भी ख़फ़ा है कि 

मैं उसे समय नहीं दे पा रहा.... 

पेट का दर्द बढ़ता जा रहा है 

डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा है 

कहते हैं सीने के पत्थर का एक टुकड़ा टूटकर किडनी में आ गया है शायद....

माँ मिर्ची को आग लगाकर चप्पल से कूट रही हैं...ऊपर का चक्कर बता रही हैं.....

ये लिखते लिखते एक बहुत प्यारा ख़याल दिमाग़ में आया है... लगता है आज कोई नया शे'र होगा! 

- रवि गोस्वामी-