मोहब्बत, मासूका बेहूदा लगती हैं
जब किसी वीर किसी जान तिरंगे मे लिपटती है
हो जाऐ कुर्बान देश के लिए
मगर हर किसी के हिसे मे ऐसी तकदीर कहा होती हैं
मुझे गरुर था मेरे सनम पर
और मेरे रुतबे पर, मोहब्बत क़ी गहराइयो पर
देखा इक शहीद क़ा चेहरा तो, शर्मिंदा हूँ खुद पर
हा इश्क किया हैं मैंने हर रिश्ते से
और सिदत्त से निभाया हैं
ये वहम भी साफ हो गया
जब देखा कोई वीर हमेशा दूर जाने के लिए,
घर आया हैं
मैं बैचेन हो जाता हूँ उसके कुछ पल दूर होने पर
उसके बात न करने पर
मैं कितना पागल हूँ, मैं कितना कमजोर हूँ
ये समझा हैं मेने आज कोई लाल आखिरी मुलकात के लिए आया हैं
मिशाल देते हैं मेरी प्यार क़ी अदाओ क़ी
चर्चे हैं मेरी वफाओ के, ये गलतवहमी थी
दूर हो गई, आज कोई मांग सुनी कर के
वफ़ा करने आया हैं
जय हिन्द!!जय भारत!!


