अपने दर्द को छुपाए क्यों फिरते हो

पत्थरों से दिल लगाए क्यों फिरते हो


हमने माना कुछ रंजिश है बीते कल से

आज की खुशियां ठुकराए क्यों फिरते हो


गलत इंसान से रिश्ता तुमने जोड़ा था फिर

नाकामी का इल्ज़ाम प्यार पर लगाए क्यों फिरते हो


वो दिल तोड़ गया फितरत उसकी ऐसी ही थी

उस बेवफ़ा की याद में आसूं बहाए क्यों फिरते हो


जो चाहा वो ना मिला कोई बात नहीं पर

किसी के नफ़रत में खुद को जलाए क्यों फिरते हो