मिले कभी जो जिंदगी के खेल से फुरसत,
चलो फिर से खेलें कहते हैं ये खिलौने मेरे
आज भी एक बच्चा बैठा है छुपकर अंदर मेरे, ये कहते खिलौने मेरे
आज भी संभाल रखा है मां ने बचपन को मेरे, ये कहते हैं खिलौने मेरे
कुछ खो गए, कुछ टूट गए खेल खेल में मेरे, अभी भी पूरी यादें साथ हैं, कहते हैं ये खिलौने मेरे
तुम सब भूल रही हो जिंदगी के दौर में, आओ याद
दिलाएं तुम्हे कुछ कहानियां कहते हैं ये खिलौने मेरे
कभी मिले जिंदगी के खेल से फुरसत,
चलो फिर से खेलें कहते हैं ये खिलौने मेरे
–रौनक प्रवीन

