थोड़ी-सी उम्मीद चाहिए


जैसे खोयी कविता में

छपते दृष्टांत समाचार


जैसे सिकुड़ते मानचित्र में

अंतरिक्ष को भेदती भाग्यरेखा


जैसे भरे भादो में

छिटकिनियों की ठिठक


जैसे गरम भात की उड़ती गंध से

माँ के चेहरे पर हंसी


जैसे प्रदूषित वातावरण में

अमलतास की खुशबू



थोड़ी-सी उम्मीद चाहिए


जैसे मृत्यु शैया पर

मोक्ष का वरदान


जैसे कॉमरेड बने युवाओं में

गाँव का सम्मान


जैसे प्रेम में

त्याग और समर्पण की काया


जैसे रसोई में बैठ

समस्त जगत भ्रमण की माया


जैसे उपन्यास पढ़ते हुए

एकाग्रता की बूंद


जैसे दम भरते कार्यकर्ताओं

में उस चाय की बूंद