मैं किसान तू भी किसान,

फिर कहां से आया खालिस्तान ।१।

सरकार ने चाहा समाधान ,

परंतु लोगों को कहां है ज्ञान ।


बिन शब्द मै निः शब्द हूं,

गणतंत्र पर देखा खाकी का अपमान

मैं किसान तू भी किसान ,

फिर कहां से आया खालिस्तान ।२।


उन झोला छाप अखबारों ने,

दलाल मीडिया के पत्रकारों ने ,

छीना मेरे किसानों का सम्मान ,

बहुत हुआ तुम्हारा फहराना अब ' निशान '

मैं किसान तू भी किसान ,

फिर कहां से आया खालिस्तान ।३l

                                                  रत्नेश