ये कैसी आपदा आयी है,घनघोर अँधेरा छाई है,

चहुँ दिशा में हाहाकार मचा,सब दिल में उदासी छाई है,,

सड़के,गलियां विरान हुआ, कितनो का घर बरबाद हुआ,,

कितनो का चेहरा मुरझाया,संग जीवनसाथी का प्यार छुटा,,


  प्रकृति ने कैसी करवट ली है, जीवन पर ग्रहण लगा ‌रखी है,

  मौत का ताण्डव हो रहा,आँखो में खौफ पसर रहा,,

सब इधर,ऊधर यूँ भटक रहे,अपनो से मिलने को तड़प रहे,

 ये देख मन विचलित हुआ,कुदरत ने कैसा खेल रचा,,


कितनो का सपना बिखर गया,कितनो का जीवन ऊजड़ गया ,

अपनो के बीच रहकर भी,"क्यों" दो‌ गज की दूरी पनप रहा,,

कुदरत का है ये प्रकोप या,अन्त कलयुग का आया है,

अब तुमहीं बताओ "हे भगवन"सब देख‌ दया तुझे ना आया है,,

   तेरी ही बनायी दुनिया में,कैसी ये महामारी आई है,

  अब तुमहीं करो चमत्कार प्रभु, विपदा अब करो दूर प्रभु,, हो काल के तुम महाकाल प्रभु,इस काल का भी करो विनाश प्रभु,,

इस जीवन रुपी नइया के,एक तुमहीं खेवनहार प्रभु,,

हम सबकी यही पुकार प्रभु, अब लो कोई अवतार प्रभु,

साँसों की डोरी टूट न जाए,अब अपनो से कोई दुर न जाए,,

 जन के तुम अब एक आस प्रभु,अब लो कोई अवतार प्रभु,,

अपनी बनायी इस सृष्टि का,अब रोक लो ये विनास प्रभु,,

अब लो कोई अवतार प्रभु,अब लो कोई अवतार प्रभु,,,