मन को मेरे
मन को मेरे! खा रही है कोई बात,
खोखला कर रही है कोई बात!!
कहीं जाने को मन नहीं करता,
न कुछ करने की आकांक्षा जग रही!
मन को मेरे! खा रही है कोई बात,
खोखला कर रही है कोई बात!
कीसी कोने में छीपे रहने को मन करता है,
ख्वाब अपने पुरे करने को मन करता है!
मन को मेरे! खा रही है कोई बात,
खोखला कर रही है कोई बात!
खाली पन्नों को रंगों से संवारने को मन करता है
सोचती हूं जींदगी भी अपनी ऐसे ही संवार सकु में!
मन को मेरे! खा रही है कोई बात,
खोखला कर रही है कोई बात!
खुद से ही आगे बढ़ने को मन करता है,
मां-बाप को मेरे, गर्व से खुश करने को मन करता है!
मन को मेरे! खा रही है कोई बात,
खोखला कर रही है कोई बात!
-jGRathore
