थोडी मुस्कुराहटें, थोडे आँसू साथ रख़ना.. थोडी ख़ुशियाँ, ग़म भी बाँट लेना.. क्या जाने ज़िंदगी में कब कौन मुकर जाए, तुम्हें अकेला छोड जाए.. तब ये मुस्कुराहटें ख़ुशियाँ देती हैं और आँसू ग़मों से समझौता करते हैं! जीवन बडा उसूलों वाला होता है, जितना लेता है उतना ही लौटा देता है.. हम भी तो उसे सताते हैं, उसे हमेशा थोंप कर देना चाहते हैं.. वो भी हम पर सब कुछ फिर थोंप देता है! सच्चा रिश्ता अपने साथ इक यही निभाता है, बाक़ी तो मतलब का सब रह जाता है.. कोई किसी के लिए ना आता, ना जाता है.. ये ही तो जीवन होता है, ना किसी का कम ना ज़्यादा होता है। ज़िंदगी से बडा ग़ुरु कोई कहाँ पाता है.. यही संघर्ष, यही ताल-मेल सीखाता है.. जनाब! बडा कठिन इसका हर इम्तिहान कहलाता है, कैसे कैसे रंग दिखाता है, तभी तो हर क़दम मज़बूत हो पाता है.. इस बात का ख़्याल भी रख़ता है के वो हर हाल में हमें मुस्कुराते हुए रखता है.. थोडा जज़्बा भी बचा कर रख़ना, जीना कुछ आसान होता है.. क्योंकि हर इम्तिहान का एक आख़िरी पडाव होता है, सब कर्मों का लेखा-जोखा इसके पास होता है.. ये ही तो जीवन होता है, ये ना किसी का कम ना ज़्यादा होता है। #रshmi