
थोडी मुस्कुराहटें, थोडे आँसू साथ रख़ना..
थोडी ख़ुशियाँ, ग़म भी बाँट लेना..
क्या जाने ज़िंदगी में कब कौन मुकर जाए, तुम्हें अकेला छोड जाए..
तब ये मुस्कुराहटें ख़ुशियाँ देती हैं और आँसू ग़मों से समझौता करते हैं!
जीवन बडा उसूलों वाला होता है, जितना लेता है उतना ही लौटा देता है..
हम भी तो उसे सताते हैं, उसे हमेशा थोंप कर देना चाहते हैं..
वो भी हम पर सब कुछ फिर थोंप देता है!
सच्चा रिश्ता अपने साथ इक यही निभाता है, बाक़ी तो मतलब का सब रह जाता है..
कोई किसी के लिए ना आता, ना जाता है..
ये ही तो जीवन होता है, ना
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