क़द..'s image
क़द छोटा रह गया सपनों की उडानों से, पर जद्दो- जहद ज़ारी है... ज़िंदगी तू भी कब तक मुझ पर भारी है? चल देख़ें तेरा भी कुछ क़माल, आ करें दो-दो हाथ.. तूने बहुत की तैयारी है, आ भी जा अब फिर मेरी बारी है तुझसे उम्मीदें रखी, ये बडी मेरी नादानी है तूने भी दिख़ा दिया ढंग अपना,
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