शब्द हो मेरी कविता की, तुम
एक गजल सी लगती हो l
धार हो जीवन सरिता की, तुम
मेरे साथ साथ बहती हो l

फूलों में जैसे रजनीगंधा, तुम
मन को महकाती हो l
नदियों में जैसे गंगा, तुम
हृदय को पावन कर जाती हो l

पतझड़ में बाहर सी, तुम
मुझको हार्षति हो l
सावन में मेघमल्हार सी, तुम
जीवन संगीत बन जाती हो l

तेरे संग दिन ढलता है,
रातों को मेरे बाहों में सोती हो l
अंधेरा छट गया तेरे आने से,
तुम ही मेरे जीवन की ज्योति हो l

मेरी बिटिया,
तुम ही मेरी प्रेरणा हो l