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ये वक़्त गुज़रा और मैं भी गुज़रा

न कोई खैरख्वाह है

न कोई हमसफ़र ही गुज़रा

बस आदतन चलते रहते हैं

इन सुनसान राहों पे

न कोई पतझड़

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